Mansarovar-Part 4 - Premchand
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मानसरोवर प्रेमचंद की कहानियों का संचयन है जिसे उन्होंने स्वयं आठ खंडों में तैयार किया था। इसे भारतीय साहित्य की महान रचनाओं में से एक माना जाता है। लोकप्रिय और पठनीय इन आठ खंडों की कहानियों को उत्तरी भारत के जन-जीवन का आईना माना जाता है। प्रेमचंद का लेखन अपने गहरे सरोकारों और हृदयस्पर्शी लेखन-कला के कारण आज भी महत्त्वपूर्ण बना हुआ है। प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को बनारस के पास छोटे-से गाँव लमही में हुआ था। उनका पूरा नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। बचपन से ही उन्हें पुस्तकों से बहुत लगाव था। सबसे पहले उन्होंने ‘नवाबराय’ उपनाम से अपनी रचनाएँ लिखीं। बाद में उन्होंने ‘प्रेमचंद’ उपनाम अपनाया। उनका आरंभिक लेखन उर्दू में है लेकिन बाद में हिन्दी में लिखना शुरू किया। अपने 56 वर्ष के छोटे जीवन में उन्होंने 25 उपन्यास और 200 से अधिक कहानियाँ लिखीं। 8 अक्टूबर 1936 को ‘उपन्यास सम्राट’ प्रेमचंद की मृत्यु हो गई।
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