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Kaaljayi Kavi Aur Unka Kavya: Narsi Mehta - Madhav Hada (Edited By)

Kaaljayi Kavi Aur Unka Kavya: Narsi Mehta - Madhav Hada (Edited By)

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Kaaljayi Kavi Aur Unka Kavya: Narsi Mehta - Madhav Hada (Edited by)

About The Product:

गागर में सागर की तरह इस पुस्तक में हिन्दी के कालजयी कवियों की विपुल काव्य-रचना में से श्रेष्ठतम और प्रतिनिधि काव्य का संकलन विस्तृत विवेचन के साथ प्रस्तुत है। नरसी भगत उत्तर भारत के जन मंे एक लोकप्रिय संत कवि हुए जिनकी कविताएँ आज भी लोगों को कंठस्थ हैं। उनका पूरा नाम नरसी मेहता था और जन्म गुजरात में हुआ, लेकिन राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, हिमाचल और पश्चिम उत्तर प्रदेश तक इनकी ख्याति फैली। उनके काव्य में दो विशेषताएँ हैं। एक, वे पूरी तरह से लोक के कवि हैं। इतना कि भारतीय साहित्य में उनके जैसा लोक सचेत भक्त कवि कोई दूसरा नहीं है। उनकी चिन्ताएँ और सरोकार लौकिक हैं, जिसका प्रमाण उनके लेखन में बार-बार मिलता है। दूसरी विशेषता उनके काव्य संसार की यह है कि इसमें शृंगार भी अपने चरम पर है और साथ ही भक्ति और वैराग्य का स्वर भी बहुत गूढ़ और मुखर है। नरसी मेहता स्वयं को भक्त अधिक और कवि कम मानते थे, लेकिन वास्तव में उनकी रचनाएँ अनायास और सहज कविताएँ हैं। कुल मिलाकर उनकी भाषा में गुजराती, मराठी और राजस्थानी का मिश्रण है। प्रस्तुत संकलन नरसी मेहता के विपुल साहित्य की एक बानगी भर है। इस पुस्तक का चयन व संपादन माधव हाड़ा ने किया है, जिनकी ख्याति भक्तिकाल के मर्मज्ञ के रूप में है। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर के पूर्व आचार्य एवं अध्यक्ष माधव हाड़ा भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में फ़ैलो रहे हैं। संप्रति वे साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली की साधारण सभा और हिन्दी परामर्श मंडल के सदस्य हैं।

Product Details:

  • Author: Madhav Hada (Edited by)
  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 112
  • Publication Date: 2024

    Legal Disclaimer: Product color may slightly vary due to photographic lighting sources or your monitor settings.

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