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Buddh Tum Laut Aao (Life & Times Biography Of Gautam Buddha) Buddhist Philosophy - Buddhism Life, Teachings, And Legacy Of Buddha Hindi Edition-Dinkar Joshi

Buddh Tum Laut Aao (Life & Times Biography Of Gautam Buddha) Buddhist Philosophy - Buddhism Life, Teachings, And Legacy Of Buddha Hindi Edition-Dinkar Joshi

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Buddh Tum Laut Aao (Life & Times Biography Of Gautam Buddha) Buddhist Philosophy - Buddhism Life, Teachings, And Legacy Of Buddha Hindi Edition-Dinkar Joshi

About the Products:

हमें बताया जाता है कि महात्मा बुद्ध ने वैदिक परंपरा से असंतुष्ट होकर अपना पथ अलग बनाया था, इसीलिए तत्कालीन वैदिक परंपरा ने उनको स्वीकार नहीं किया। उनके दर्शन को 'नास्तिक दर्शन' कहकर अवहेलना की गई। इतना ही नहीं, उन्हें हिंदू-विरोधी दरशाकर-मानकर तिरस्कृत किया जाता रहा। सदियों के बाद उन्हें विष्णु के दशावतार में नौवें अवतार के रूप में स्वीकृत किया जा सका। इतिहास की यह भारी विडंबना है कि जिस धरती पर बुद्ध ने पहली बार बुद्धत्व के प्रकाश को प्रसारित किया, उसी धरती से बौद्ध धर्म और स्वयं बुद्ध भी लगभग अदृश्य हो गए। वैदिक परंपरा में पले हुए राजकुमार सिद्धार्थ को जब प्रतीत हुआ कि जीवन से जुड़े हुए जन्म, जरा, मृत्यु आदि निषेधकों के साथ ही प्रेम, पारस्परिक संबंध, परिवार इत्यादि विषय भी आजीवन प्रश्न ही पैदा करते हैं, तब उन्होंने इन प्रश्नों पर पूर्णविराम लगाने के मार्ग ढूँढ़ने के लिए कड़ी तपश्चर्या का आरंभ किया। इन प्रश्नों के उत्तर उन्होंने तो पा लिये और अपने इस नए मार्ग के प्रति उन्होंने सारे विश्व को उन्मुख भी किया, परंतु सारा विश्व इस मार्ग की ओर देखना चूक गया और आज शताब्दियों के पश्चात् भी जिस उँगली ने इस मार्ग को दिखाया, उस उँगली की ओर ही देखता रहा। अब महात्मा बुद्ध तो हमारे बीच में नहीं रहे। प्रश्नों का उत्तर होने के बावजूद विश्व उन प्रश्नों से आज भी अत्यंत पीड़ित हो रहा है। इस केंद्रवर्ती विचार के साथ उपन्यास 'प्रश्नों पर पूर्णविराम' 2008 में पहली बार प्रकाशित हुआ था। अब ऐसा प्रतीत होता है कि भगवान् बुद्ध ने जिन उत्तरों को प्रस्तुत किया था, उन्हें जब हम आत्मसात् नहीं कर पाए हैं, तब क्यों न उन भगवान् को ही निवेदन करें - 'बुद्ध ! तुम लौट आओ'।

Language: Hindi

Page No: 256

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